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बस 1411 बाघ बचे हैं, अपने बच्चो को क्या बताओगे?

Just 1411 left. जैसा की आपको फोटो को देखकर ही पता चल गया होगा की में आप सब के सामने क्या विचार रखना चाहता हूँ. पिछले दिनों में मैंने जब ये देखा की हमारे भारतवर्ष देश में जहाँ का राष्ट्रीय पशु बाघ हैं और पिछले कई दशको पहले हमारे देश में इनकी संख्या लगभग 40,000 के आस-पास थी लेकिन अब इनकी संख्या सिर्फ 1411 ही रह गयी हैं. अब आप लोग सोचंगे की इसमें हम क्या कर सकते हैं, इनके अवैध शिकार को कैसे रोकेंगे तो आप लोगो का सोचना भी ठीक हैं लेकिन इन सबमे कहीं न कहीं हमारा ही दोष हैं, कैसे ???

कुदरत और प्रकृति ने हमारे देश को ही नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी को जीवन से नवाजा हैं और हर तरफ जहाँ भी नजर जाती हैं वहां हमें इस जीवन की विभिन्न उदहारण देखने को मिल जायंगे. और कुदरत ने सब को अपने मुताबिक जीवन व्यापन करने का हक़ दिया हैं. लेकिन हम मनुष्यों ने तो सिर्फ ये एक सोच बना ली हैं की ये पृथ्वी सिर्फ हमारी हैं और सारा अधिपत्य इसपर हमारा ही हैं. क्या ये हम सही कर रहे हैं ???? लेकिन मैं आपको बतलाना चाहता हु की हम भी पहले कभी इन बेजुबानो की तरह ही थे..... और हमने अपने आप को इतना विकसित किया की हम बाकियों को भूल गए.
शायद में भी इसके बारे में कभी बात नहीं करता, अगर में ये न देखता. लेकिन अब मुझे भी दुःख होता हैं की पिछले कुछ दशको में जो इनकी संख्या में इतनी गिरावट आई हैं की हमारी आने वाली नयी पीड़ी को हमें इनके बारे में बताने के लिए उन्हें किसी संग्राहलय में ले जाना पड़ेगा जहाँ पर इनकी भी हड्डियों का एक ढाचा या इनका पुतला बना होगा ठीक वैसे ही जैसे हमें अभी डायनासोरो के बने होते हैं.

और तो और हो सकता हैं की हमारे देश का राष्ट्रीय पशु के सूचक के रूप में हमें कोई और जीव मिल जाये...............
लेकिन क्या ये सही हैं और कितने हद तक ??????
अभी भी हमने कुछ न किया तो शयद ये नौबत आ जाये की हम अपने बछो को आगे चल कर ये बताये की :-
बेटा हमारा राष्ट्रीय पशु "?????" हैं.
और उसने हमसे गलती से ये प्रश्न पूछ लिया की पहले तो हमारा राष्ट्रीय पशु बाघ था लेकिन अब कैसे बदल गया ? तो आप लोग तैयार हैं न इसका जवाब देने के लिए...........
मैंने तो तैयारी कर ली हैं की मुझसे जितना होगा में उतना इसके बारे में दुसरे लोगो को जागरूक करूँगा. आप भी करे.
और धन्यवाद् दे Aircell कंपनी को जिन्होंने इसके लिए लोगो को जागरूक करने के लिए अपना एक कदम इस दिशा की ओर बढाया हैं और हमें याद दिलाया की ......
हमने अपने जीवन को तो सवार लिया लेकिन उन बेजुबानो का क्या दोष था?
 देखे Save The Tigars और आप भी इस मुहीम में जुड़े.
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February 17, 2010 at 6:29 AM

बाघ बचाअओ-यज्ञ में हिन्दी चिट्ठाकारी की ओर से पहली आहुति है आपकी ! आभार !

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